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वे आठ जिनसे मृत्यु भी डरती है

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार - वे आठ जिनसे मृत्यु भी डरती है

कहावत है कि मृत्यु के सामने किसी का भी बस नहीं चलता है। किन्तु हर नियम और सिंद्धात के साथ ही कोई न कोई अपवाद भी जुड़ा होता है। अपवाद की इस सर्व व्यापकता से मोत भी नहीं बच पाई है। आज यदि किसी से यह कहा जाए कि इस पृथ्वी पर कोई एसा भी है जो कि हजारों वर्षों से जिंदा है। वो कोई एक नहीं बल्कि पूरे आठ हैं। उन अद्भुत महाप्राणधारी अमर आत्माओं को अष्ट चिरंजीवी के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। यह सुनकर सहसा ही किसी को विश्वास नहीं होगा। किन्तु जो कहा जा रहा है वह पूर्णत: प्रामाणिक तथा शास्त्रसम्मत होने के साथ ही पूरी तरह विज्ञान सम्मत भी है। लीजिये रहस्य से पर्दा उठाते हुए उनके नाम कालक्रम के अनुसार ही क्रमश: प्रस्तुत हैं-

१. मार्कण्डेय : ये अति प्राचीन मुनि हैं जिनका कल्पों में भी अंत संभव नहीं है।
२. वेद-व्यास : ये ब्रह्मऋषि हैं इन्होंने ही चारों वेदों का सम्पादन एवं पुराणों का लेखन कार्य किया।
३. परशुराम : ईश्वर के चौबीस अवतारों में से एक, जो पृथ्वी को अठारह बार क्षत्रिय विहीन करने के लिये प्रसिद्ध हैं।
४. राजा बलि : अपना सर्वस्व भगवान वामन को दान कर महादानी के रूप में विख्यात हुए। इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान विष्णु इनके द्वारपाल बने।
५. हनुमान : भगवान शिव के ११ वें रूदा्रवतार, भगवान श्री राम के परम भक्त के रूप में प्रसिद्ध।
६.विभीषण : लंका के राजा रावण के अनुज जिन्होंने राम-रावण युद्ध में धर्म का पक्ष लेते हुए श्री राम का साथ दिया।
७. कृपाचार्य : महाभारत कालीन एक आचार्य जो कौरवों और पाण्डवों के गुरु थे।
८. अश्वत्थामा : ये कौरवों और पाण्डवों के प्रसिद्ध आचार्य द्रोणाचार्य के सुपुत्र थे। इनके मस्तक पर मणी जड़ी हुई थी।